देहरादून। बैंकिंग सेक्टर में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किए जाने की मांग को लेकर बुधवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) से जुड़े बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की नौ यूनियनें शामिल रहीं। राज्यभर में बैंकों का कामकाज ठप रहने से वित्तीय लेनदेन बुरी तरह प्रभावित हुआ और करीब 8 हजार करोड़ रुपये के व्यवसाय पर असर पड़ा।
देहरादून में बैंक कर्मियों ने राजपुर रोड स्थित सेंट्रल बैंक के सामने प्रदर्शन किया और रैली निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से जल्द मांगों पर निर्णय लेने की अपील की।
यूएफबीयू के पदाधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच कार्य दिवस लागू किए जाने की मांग की जा रही है। वर्ष 2015 में हुए दसवें द्विपक्षीय समझौते और सातवें जॉइंट नोट के तहत भारतीय बैंक संघ और सरकार के बीच यह सहमति बनी थी कि हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहेगा, जबकि अन्य शनिवार कार्य दिवस होंगे। उस समय सरकार ने शेष शनिवारों को अवकाश घोषित करने की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह मामला अब तक लंबित है।
इसके बाद वर्ष 2022 में सरकार, भारतीय बैंक संघ और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई। वर्ष 2023 में हुए विचार-विमर्श में यह तय किया गया कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन कार्य समय में 40 मिनट की वृद्धि कर शेष सभी शनिवारों को अवकाश घोषित किया जाएगा। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन बीते दो वर्षों से इसे स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
पदाधिकारियों के अनुसार, सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया न मिलने के कारण पहले 24 और 25 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया गया था, जिसे सरकार द्वारा विषय विचाराधीन बताए जाने के बाद स्थगित कर दिया गया था। अब तक मांगों का समाधान न होने पर बैंक कर्मियों को दोबारा हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
यूएफबीयू देहरादून के संयोजक इंदर सिंह रावत ने कहा कि आरबीआई, एलआईसी, जीआईसी सहित कई वित्तीय संस्थानों और केंद्र व राज्य सरकार के अधिकांश कार्यालयों में सोमवार से शुक्रवार तक ही कार्य दिवस होते हैं। स्टॉक एक्सचेंज, मनी मार्केट और विदेशी मुद्रा लेनदेन भी शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। इसके बावजूद बैंक कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की जा रही है।